मैंने एक लड़की के हाथ में पैन जैसा कुछ देखा जिसे वह अपने साथी के हाथ पर लगा रही थी और उसके ग्रुप के बाकी लोग हैरानी से मुस्कुराते हुए उसकी इस कला को देख रहे थे। मैं किसी शादी के घर में होने वाली मेहंदी की रस्म का जिक्र नहीं कर रहा हूं। उस लड़की के हाथ में इंजेक्शन था जिसमें कुछ नशीला लिक्विड मिला था और उसको वह अपने दोस्त के हाथ में लगा रही थी। यह सब मैंने यूं ही गुजरते हुए फुटपाथ पर होते हुए देखा। यह दृश्य बहुत अच्छा हो सकता था अगर उसके हाथ में कलम होता और वह उससे अपने साथी को सिखा रही होती या उसके हाथ में मेहंदी होती जो अपने साथी के हाथ में लगा रही होती। लेकिन अब इस तरह के वाकिये आमतौर पर देखने को मिल जाते हैं।
AIIMS की 2018 की रिपोर्ट में सड़क पर रहने वाले बच्चों के सिलसिले में बहुत हैरान करने वाली बातें सामने आई थी जो कुछ इस तरह है:
- लगभग 29% बच्चे तो ऐसे हैं जो अपने साथियों के दबाव में आकर नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं जबकि 19% बच्चे ऐसे हैं जो खुद ही उत्सुक होकर और अपनी जिज्ञासा के कारण इनका शिकार बनते हैं, 9% तो ऐसे हैं जो तनाव में आकर नसों का सेवन करते हैं।
- यह सर्वे 7 से 18 साल तक के बच्चों के बीच हुआ था जिसमें ज्यादातर बच्चे alcohol, inhalants, cannabis, heroin, opium, pharmaceutical opioids, sedatives और इंजेक्शन का इस्तेमाल करते थे।
- तकरीबन 8 से 9 साल के बीच ही सड़क पर रहने वाले बच्चे ड्रग्स का सेवन शुरू कर देते हैं। और 13 साल की उम्र तक तो हर तीन में से एक सड़क पर रहने वाला बच्चा नशे का आदी बन चुका होता है।
मकसद आंकड़ों की चर्चा करना नहीं है, इससे ज्यादा जीवंत और नए आंकड़े आपको ढूंढने पर मिल जाएंगे और आंकड़ों से भी ज्यादा सुझाव आपको इन समस्याओं से निपटने के भी मिल जाएंगे।
लिखने वाले खूब लिख रहे हैं और पढ़ने वाले भी खूब पढ़ रहे हैं, लेकिन करने वाले ?
करने वाले भी कर ही रहे हैं।
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